चार खुराक में चिकनगुनिया गायब !!

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चिकनगुनिया मच्छर की एक प्रजाति के कारण होता है । चिकनगुनिया में तेज बुखार, शरीर में दर्द विशेषकर मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होता है। ऐसा दर्द गठिया के रोगियों में देखा जाता है। रोगी को जोड़ों के दर्द के साथ-साथ जोड़ों में अकड़न भी महसूस हो सकती है, जोकि पेनकिलर लेने के बाद भी ठीक नहीं होती है।

चिकनगुनिया के लक्षण :

चिकनगुनिया मच्छरों के काटने के कारण होता है। शायद आपको ये नहीं पता कि जिन मच्छरों के जाति के कारण डेंगू या जीका का संक्रमण होता है उसी जाति के मच्छर से ही ये बीमारी होती है। मच्छर का काटने के 3-7 दिन के बाद इसके लक्षण नजर आने लगते हैं।

लिम्फ नॉड में सूजन :

ज्यादातर लोगों को ये पता नहीं कि इसके संक्रमण के कारण लिम्फ नॉड में सूजन आ जाता है। लिम्फ नॉड कान के पीछे, जबड़े के भीतर, गर्दन के आस-पास के जगहों में होता है। इन जगहों पर सूजन होने पर नजरअंदाज न करें।

अत्यधिक थकान :

चिकनगुनिया के कारण अत्यधिक थकान महसूस होता है, क्योंकि फीवर और दर्द के कारण आपको थकान महसूस होना आम होता है।

हाई फीवर :

अगर तीन दिनों तक आपको 102 – 104 डिग्री तक बुखार हो रहा है तो यह फीवर चिकनगुनिया हो सकता है।

सिर दर्द :

चिकनगुनिया के लक्षणों में सरदर्द भी एक आम लक्षण है जो संक्रमण होने के कुछ दिनों के बाद होना शुरू हो जाता है। अगर आपको फीवर, सिर दर्द के साथ ज्वाइंट पेन है तो दो दिनों तक ये लक्षण ठीक नहीं हो रहा है तो चिकनगुनिया हो सकता है।

जोड़ों और मसल्स में दर्द :

अक्सर मसल्स में या जोड़ो में दर्द होने के कारण इसके लक्षणों को समझ पाना मुश्किल हो जाता है। इस बीमारी के कारण हाथ और पैरों में सूजन होने के साथ दर्द होता है।

स्किन रैशेज़ :

अक्सर इस बीमारी में हाई फीवर के साथ स्किन रैशेज़ निकलने लगते हैं। लाल-लाल दाग हथेली, फेस और टोरसो में विशेषकर होता है।

उल्टी :

इस इंफेक्शन के कारण उल्टी के लक्षण के साथ अत्यधिक कमजोरी महसूस होती है। अगर आपके आस-पास मच्छरों का बसेरा है तो ऐसे लक्षण महसूस होने पर तुरन्त डॉक्टर के पास जायें।

उपचार :

चिकनगुनिया रोग होने पर निम्नलिखित के अनुसार काढ़ा बनाकर सेवन करें |

  1. तुलसी पत्र – 10
  2. नीम की निम्बौली – 5
  3. सोंठ – 5 ग्राम
  4. छोटी पीपल – 3 ग्राम
  5. गुड़ – 20 ग्राम

उपर्युक्त पाँचों चीजों को 200 मिली. पानी में उबालें | जब पानी आधा रह जाये तब छानकर चाय की तरह पी लें |इस काढ़े को प्रातः एवं सायं पियें |

दो दिन तक लगातार इस काढ़े को लें | इतने से ही चिकनगुनिया जाता रहेगा | और इस बुखार के बाद होने वाली परेशानियाँ, जैसे – जोड़ों में दर्द, कमजोरी आदि से भी पूर्ण रूप से निजात मिल जाएगी |

 

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