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    यह प्रयोग सभी तरह के वात दर्द को कर देगा चुटकियों में गायब !

    . By- Dr. Kailash Dwivedi जानिए एक अनुभूत एवं अदभुत तेल बानाने की विधि जो जोड़ों के दर्द, घुटनो के दर्द, कंधे की जकड़न...

    नीम के औषधीय प्रयोग

    By- Dr.Kailash Dwivedi नीम भारतीय मूल का एक सदाबहार वृक्ष है। इसका स्वाद तो कड़वा होता है लेकिन इसके फायदे तो अनेक और बहुत प्र... Source:...

    इन सरल प्रयोगों से नाखूनों का फंगल संक्रमण हटायें

    . By- Dr. Kailash Dwivedi नाखूनों में फंगल इन्फेक्शन हो जाने से न सिर्फ बल्कि नाखूनों की सुन्दरता भी नष्ट हो जाती है बल्कि क... Source:...

    इन उपायों से घटा सकते हैं रक्त में क्रिएटिनिन का स्तर !

    . By- Dr. Kailash Dwivedi किसी व्यक्ति के मूत्र में क्रिएटिनिन (creatinine) का बढ़ा हुआ स्तर गुर्दों की बीमारी के लिए उत्तरदायी ... Source: इन उपायों...

    आँखों का फड़कना रोकते हैं यह सरल उपाय !

    . By- Dr. Kailash Dwivedi आँखों का फड़कना (blepharospasms),  मांस-पशियों का एक अनैच्छिक संकुचन है, जिसका मुख्य कारण तनाव होता ह... Source: आँखों का फड़कना...

    पढ़िए -ताज़गी से भर देने वाली गहरी निद्रा के लिये ध्यान की एक विधि

    संभव है आप रात्रि में ठीक तरह से न सो पाते हों। बहुत कम लोग ठीक तरह से सो पाते हैं। जब आप रात्रि...

    प्रोस्टेट का बढ़ना – प्राकृतिक उपचार

    By- Dr. Kailash Dwivedi प्रोस्टेट ग्लैंड बढ़ने की समस्या 40 वर्ष की आयु के बाद सामने आती है | लगभग  70-80 प्रतिशत व्यक्ति इस...

    द्वितीय अध्याय (नष्टरागप्रत्यानयन प्रकरण)

    श्लोक-1. चण्डवेगां रञ्जयितुमशक्नुवन्योगानाचरेत्।।1।। अर्थ- प्रचंड वेग वाली स्त्री को अनुरक्त तथा खुश करने में असमर्थ पुरुषों की योगों (औषधि-साधन) का प्रयोग करना चाहिए। श्लोक-2. रतस्योपक्रमे संबाधस्य...

    प्रथम अध्याय – शुभंगकरण प्रकरण

    श्लोक-1. व्याख्यातं च कामसूत्रम्।।1।। अर्थ- कामसूत्र के बारे में की गयी व्याख्या अब समाप्त होती है। श्लोक-2. तत्रोक्तस्तु विधिभिरमिप्रेतमर्थमनधिगच्छत्रोनिषदिकमाचरेत्।।2।। अर्थ-  कामसूत्र में बतायी गयी गयी विधियों से...

    षष्ठम अध्याय : अन्तः पुरिका वृत प्रकरण

    श्लोक (1)- नान्तः पुराणां रक्षणयोगात्पुरुषसंदर्शन विद्यते पत्युश्चैकत्वादनेक-कसाधारमत्वाच्चातृप्तिः। तस्मात्तानि प्रयोगत एव परस्परं रञ्ञयेयुः।। अर्थ- सुरक्षा को देखते हुए राजाओं के महलों में बहुत ज्यादा सख्त पहरा...

    पंचम अध्याय : ईश्वरकामितम प्रकरण

    श्लोक (1)- न राज्ञां महामात्राणां वा परभवनप्रवेशो विद्यते। महाजनेन हि चरितमेषां दृश्येतऽनुविर्धग्यते च।। अर्थ- राजा, मंत्री और विद्वान लोग दूसरों के घरों में आसानी से...

    चतुर्थ अध्याय : दूतीकर्म प्रकरण

    श्लोक (1)- दशितेगिंताकारां तु प्रविरलदर्शनामपूर्वां च दूत्योपसर्पयेत्।। अर्थ- जो स्त्री पुरुष पर अपने भाव संकेतों को तो प्रकट कर चुकी हो  लेकिन फिर भी मिलने-जुलने...

    तृतीय अध्याय : भावपरीक्षा प्रकरण

    श्लोक (1)- अभियुञ्ञानो योषीतः प्रवृत्तिं परीक्षेत। तया भावः परीक्षतो भवति अभियोगांश्च प्रतिगृह्वीयात्।। अर्थ- पुरुष जब किसी स्त्री से मिलता-जुलता है तो उसे स्त्री के स्वभाव...

    द्वितीय अध्याय : परिचयकारण प्रकरण

    श्लोक (1)- यथा कन्या स्वयमभियोगसाध्या न तथा दूत्या। परस्त्रियस्तु सूक्ष्मभावा दूतीसाध्या न तथात्मनेतयाचार्याः। अर्थ- कामशास्त्र के पुराने आचार्यों के मुताबिक जिस तरह से कुंवारी युवती...