3. कन्यासम्प्रयुक्तक

3. कन्यासम्प्रयुक्तक

    तृतीय अध्याय – बालोपक्रमाः प्रकरण

    श्लोक-1. वरणसंविधानपूर्वकमधिगतायां विस्त्रम्भणमुक्तम्।।1।। अर्थ : या तु व्रियमाण न लभ्यते तत्र गान्ध्रर्वादयश्वत्वारो विवाहाः। कामसूत्र में बताया गया है कि शास्त्रों के अनुसार चार प्रकार से शादी की...

    द्वितीय अध्याय – कन्याविस्त्राम्भण प्रकरण

    श्लोक-1. संगतयोस्त्रिरात्रमध शय्या ब्रह्मचर्य क्षारलवण र्जमाहारस्तथा सप्ताहं सतूर्यमंगलस्त्रानं प्रसाधनं सहभोजनं च प्रेक्षा संबंधिनां च पूजनम्। इति सार्ववर्णकम्।।1।। अर्थ : युवक-युवती की शादी हो जाने के बाद...

    प्रथम अध्याय – वरण संविधान प्रकारण

    श्लोक-1. सवर्णायामनन्यपूर्वायां शास्त्रतोऽधिगतायां धर्मोऽर्थः पुत्राः संबंधः पक्षवृद्धिरनुपस्कृता रतिश्च।।1।। अर्थ : कन्या की शादी का विधान बताते हुए वात्स्यायन कहते हैं- कि जो युवक अपनी ही...