कामसूत्र

कामसूत्र

    षष्ठम अध्याय : अन्तः पुरिका वृत प्रकरण

    श्लोक (1)- नान्तः पुराणां रक्षणयोगात्पुरुषसंदर्शन विद्यते पत्युश्चैकत्वादनेक-कसाधारमत्वाच्चातृप्तिः। तस्मात्तानि प्रयोगत एव परस्परं रञ्ञयेयुः।। अर्थ- सुरक्षा को देखते हुए राजाओं के महलों में बहुत ज्यादा सख्त पहरा...

    पंचम अध्याय : ईश्वरकामितम प्रकरण

    श्लोक (1)- न राज्ञां महामात्राणां वा परभवनप्रवेशो विद्यते। महाजनेन हि चरितमेषां दृश्येतऽनुविर्धग्यते च।। अर्थ- राजा, मंत्री और विद्वान लोग दूसरों के घरों में आसानी से...

    चतुर्थ अध्याय : दूतीकर्म प्रकरण

    श्लोक (1)- दशितेगिंताकारां तु प्रविरलदर्शनामपूर्वां च दूत्योपसर्पयेत्।। अर्थ- जो स्त्री पुरुष पर अपने भाव संकेतों को तो प्रकट कर चुकी हो  लेकिन फिर भी मिलने-जुलने...

    तृतीय अध्याय : भावपरीक्षा प्रकरण

    श्लोक (1)- अभियुञ्ञानो योषीतः प्रवृत्तिं परीक्षेत। तया भावः परीक्षतो भवति अभियोगांश्च प्रतिगृह्वीयात्।। अर्थ- पुरुष जब किसी स्त्री से मिलता-जुलता है तो उसे स्त्री के स्वभाव...

    द्वितीय अध्याय : परिचयकारण प्रकरण

    श्लोक (1)- यथा कन्या स्वयमभियोगसाध्या न तथा दूत्या। परस्त्रियस्तु सूक्ष्मभावा दूतीसाध्या न तथात्मनेतयाचार्याः। अर्थ- कामशास्त्र के पुराने आचार्यों के मुताबिक जिस तरह से कुंवारी युवती...

    प्रथम अध्याय : स्त्री-पुरुष शीलावस्थापन प्रकरण

    श्लोक (1)- तेषु साध्यत्वमनत्ययं गम्यत्वमायतिं वृत्ति चादित एवं परीक्षेत।। अर्थ- पराई स्त्री के साथ संभोग करने की इच्छा रखने से पहले यह सोच लेना चाहिए...

    द्वितीय अध्याय (सपत्नी पुजेष्ठा वृत्तम् प्रकरण)

    श्लोक-1. जाडय्दौः शील्यदौर्भाग्येभ्यः प्रजानुत्पत्तेराभीक्ष्ण्येन दारिकोत्पत्तेर्नायकचापलाद्वा सपत्न्यधिवेदनम्।।1।। अर्थ- बेवकूफी, चरित्रहीनता, दुर्भाग्य तथा निःसंतान होने या बार-बार लड़कियों के पैदा होने से या पति की चंचल प्रवृत्ति...

    प्रथम अध्याय भार्याधिकारिक (एकचारिणी वृत प्रकरण)

    श्लोक-1. भार्यैकचारिणी गूढ़विश्रम्भा देववत्पतिमानुकूल्यन वर्तेत।।1।। अर्थ- दो प्रकार की भार्या (पत्नी) होती हैं। 1. पहली एकचारिणी अर्थात अकेली। 2. दूसरी सपत्निका (सौतों वाली)। इन दोनों...

    पंचम अध्याय – विवाह योग प्रकरण

    श्लोक-1. प्राचुर्येण कन्याया विविक्तदर्शनस्यालाभे धात्रेयिकां प्रियहिताभ्यामुपगृह्योपसर्पेत्।।1।। अर्थ - यदि कोई लड़का किसी लड़की से प्यार करता है लेकिन अकेले में उससे बाते करने का मौका नहीं...

    चतुर्थ अध्याय – एक पुरुषाभियोग प्रकरण

    श्लोक-1. दर्शितेग्ङिताकारां कन्यामुपायोऽमियुञ्जीत।।1।। अर्थ - प्रेमी अपने प्यार की बाते अपनी प्रेमिका से करता है और जब प्रेमिका उसके प्यार को स्वीकार कर लेती हैं तब...

    तृतीय अध्याय – बालोपक्रमाः प्रकरण

    श्लोक-1. वरणसंविधानपूर्वकमधिगतायां विस्त्रम्भणमुक्तम्।।1।। अर्थ : या तु व्रियमाण न लभ्यते तत्र गान्ध्रर्वादयश्वत्वारो विवाहाः। कामसूत्र में बताया गया है कि शास्त्रों के अनुसार चार प्रकार से शादी की...

    द्वितीय अध्याय – कन्याविस्त्राम्भण प्रकरण

    श्लोक-1. संगतयोस्त्रिरात्रमध शय्या ब्रह्मचर्य क्षारलवण र्जमाहारस्तथा सप्ताहं सतूर्यमंगलस्त्रानं प्रसाधनं सहभोजनं च प्रेक्षा संबंधिनां च पूजनम्। इति सार्ववर्णकम्।।1।। अर्थ : युवक-युवती की शादी हो जाने के बाद...

    प्रथम अध्याय – वरण संविधान प्रकारण

    श्लोक-1. सवर्णायामनन्यपूर्वायां शास्त्रतोऽधिगतायां धर्मोऽर्थः पुत्राः संबंधः पक्षवृद्धिरनुपस्कृता रतिश्च।।1।। अर्थ : कन्या की शादी का विधान बताते हुए वात्स्यायन कहते हैं- कि जो युवक अपनी ही...

    दशम अध्याय : रतारम्भावसानिक प्रकरण

    श्लोक (1)- नागरकः सहमित्रजनेन परिजारकैक्ष कृतपुष्पोपहारे संचारितसुरभिधूपे रत्यावासे प्रसाधिते वासगृह कृतस्त्रानप्रसाधनां युक्तयापीतां स्त्रियं सान्त्वनैः पुनः पानेन चोपक्रमत्।। अर्थ : नागरक को अपने नौकरों तथा दोस्तों...